अब वो बात कहाँ, वो रहमत अब तेरी आँखों में कहाँ, अब वो बात कहाँ, वो रहमत अब तेरी आँखों में कहाँ, क्या मिलती हमें राहत, अब वो तेरी रि'आयतों में कहाँ, बस हैं शब-भर के मेहमाँ, फिर रहेंगे तेरे आसमाँ में कहाँ, बस हैं शब-भर के मेहमाँ, फिर रहेंगे तेरे आसमाँ में कहाँ, बरसा दे बादल प्यार का कि ठंडक ऐसी बारिशों में कहाँ, कि ठंडक ऐसी बारिशों में कहाँ, शायद पता नहीं इन गुलों को, शायद नादाँ हैं सारे, शायद पता नहीं इन गुलों को, शायद नादाँ हैं सारे, जो तड़पन मेरे दिल में है, भँवरों की धड़कनों में कहाँ, अब वो बात कहाँ, ना नींद, ना सपनो का कारवाँ, अब ना है वो अहल-ए-दिल, अब वो बात रिश्तों में कहाँ, अब वो बात कहाँ, वो रहमत अब तेरी आँखों में कहाँ,
रहमत – divine kindness
रि'आयतों – gestures of kindness, favours, concessions
शब-भर – only for the night
मेहमाँ - guest
आसमाँ - sky
गुलों - roses
नादाँ - naive
तड़पन - agitation
कारवाँ – large group of people travelling together, caravan
अहल-ए-दिल – people with generous and loving heart
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