मेरी रातों का सुकूँ तू बन जाए, मेरे दिन का तू उजाला बन जाए, तू मेरा बन जा, मैं तेरा बन जाऊँ, अब मैं ऐसे जहाँ से क्या चाहूँ, कैसा रिश्ता ये बनाया तू ने रब, तू ने रब, रूहें भी एक, ना दूरी कोई अब, कोई अब, कैसा रिश्ता ये बनाया तू ने रब, तू ने रब, रूहें भी एक, ना दूरी कोई अब, कोई अब, हाल मेरा किया है पागल सा, मेरे दिल पे तू बरस बादल सा, जीना वहशत में, मैं वैसे मर जाऊँ, तेरी उल्फ़त मिले तो मर के जी जाऊँ, चाहे हँस दे तू ज़माने के साथ, मेरे सपनो पे यक़ीं हो ना तुझे, कैसा रिश्ता ये बनाया तू ने रब, तू ने रब, रूहें भी एक, ना दूरी कोई अब, कोई अब, कैसा रिश्ता ये बनाया तू ने रब, तू ने रब, रूहें भी एक, ना दूरी कोई अब, कोई अब, गर्मी-ए-वीराँ से मुझ को बचा ले, प्यास तू ये बुझा दे या दे दे ज़हर, तेरी बाहों में मुझे कर दे क़ैद, जिंदगी से या मुझे कर दे रिहा,
वहशत – extreme madness
गर्मी-ए-वीराँ – heat of the desert, metaphorically pains, sorrows of life
© 2024 All Rights Reserved. Design by Sultanimator