वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो ख़ुमार था जो उतर गया, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो ख़ुमार था जो उतर गया, थी वो अन-सुनी कोई दास्ताँ, थी वो अन-सुनी कोई दास्ताँ, था कलाम जो बे-असर गया, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, ना कभी तुम्हें मैं यूँ चाहता, ना कभी तुम्हें मैं यूँ चाहता, ना तड़पता दिल कभी बिन तेरे, ना चले ये साँस, क्यूँ तेरे बिन, ना चले ये साँस, क्यूँ तेरे बिन, लगे ऐसे क्यूँ के जिगर गया, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, हाँ वो हम-सफ़र बनेगा क्यूँ, वो मेरे साथ साथ चलेगा क्यूँ, हाँ वो हम-सफ़र बनेगा क्यूँ, वो मेरे साथ साथ चलेगा क्यूँ, ये सफ़र कटे तो कटे ना यूँ, ये सफ़र कटे तो कटे ना यूँ, के ये वक़्त ही हो ठहर गया, के ये वक़्त ही हो ठहर गया, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, वो थी बेख़ुदी मुझे 'इश्क़ की, बेख़ुदी, बेख़ुदी 'इश्क़ की, बेख़ुदी 'इश्क़ की, बेख़ुदी 'इश्क़ की,
बेख़ुदी – alienation of mind, ecstasy
ख़ुमार – intoxication
कलाम – poems
बे-असर – ineffective
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