अब वो दौर कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ, अब जीने में वो बात कहाँ, वो रस कोई ख़्वाबों में कहाँ, अब वो दौर कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ, अब जीने में वो बात कहाँ, वो रस कोई ख़्वाबों में कहाँ, अब है तिजारत उलफ़त भी सब, अब नहीं वो मज़हब कोई, अब है तिजारत उलफ़त भी सब, अब नहीं वो मज़हब कोई, अब है दिखावा मज़हब भी, अब असर कोई नालों में कहाँ, अब है दिखावा मज़हब भी, अब असर कोई नालों में कहाँ, अब वो दौर कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ, अब जीने में वो बात कहाँ, वो रस कोई ख़्वाबों में कहाँ, महज़ तकल्लुफ़ हँसी तेरी सारी, ये कुछ और कहाँ, महज़ तकल्लुफ़ हँसी तेरी सारी, ये कुछ और कहाँ, अब चेहरे सारे हैं झूठे, है मा'सूमी आईनों में कहाँ, अब चेहरे सारे हैं झूठे, है मा'सूमी आईनों में कहाँ, अब वो दौर कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ, अब जीने में वो बात कहाँ, वो रस कोई ख़्वाबों में कहाँ,
दौर – trend
उलफ़त – love and affection
रस - interest
तिजारत – trade, commerce, transaction, merchandise
नालों – lamentations
महज़ - mere
तकल्लुफ़ – formality
मा'सूमी - innocence
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