अब वो बात कहाँ, वो रहमत अब तेरी आँखों में कहाँ, अब वो बात कहाँ, वो रहमत अब तेरी आँखों में कहाँ, क्या मिलती हमें राहत, अब वो तेरी रि'आयतों में कहाँ, बस हैं शब-भर के मेहमाँ, फिर रहेंगे तेरे आसमाँ में कहाँ, बस हैं शब-भर के मेहमाँ, फिर रहेंगे तेरे आसमाँ में कहाँ, बरसा दे बादल प्यार का कि ठंडक ऐसी बारिशों में कहाँ, कि ठंडक ऐसी बारिशों में कहाँ, शायद पता नहीं इन गुलों को, शायद नादाँ हैं सारे, शायद पता नहीं इन गुलों को, शायद नादाँ हैं सारे, जो तड़पन मेरे दिल में है, जो तड़पन मेरे दिल में है, भँवरों की धड़कनों में कहाँ, अब वो बात कहाँ, ना है अब कोई मेहर-ए-ख़ुदा यहाँ, ना है जीनत आइनो में अब, और है वो 'इस्मतों में कहाँ, अब वो बात कहाँ, वो रहमत अब तेरी आँखों में कहाँ,
रहमत – divine kindness
रि'आयतों – gestures of kindness, favours, concessions
शब-भर – only for the night
मेहर-ए-ख़ुदा - God's grace
जीनत - beauty
'इस्मतों - virtues of integrity, chastity
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