प्यार इतना हमें ना करो, चढ़ के वो सर ना जाए कहीं, प्यार इतना हमें ना करो, चढ़ के वो सर ना जाए कहीं, बद-दु'आ बन ना जाए कहीं, पार हद कर ना जाए कहीं, प्यार इतना हमें ना करो, वो ग़म-ए-ज़ीस्त तस्लीम की, ये ख़ुशी छिन ना जाए कहीं, रात तो है ये एक रात की, वस्ल ये हर ना जाए कहीं, चाँद है, है सितारें यहाँ, है जुड़े में तेरे कहकशाँ, चाँद है, है सितारें यहाँ, है जुड़े में तेरे कहकशाँ, आज तो दूर ना जाओ तुम, कोई छू कर ना जाए कहीं, प्यार इतना हमें ना करो, चढ़ के वो सर ना जाए कहीं, कर दे मुझ को पूरी तरह, तेरे इश्क़ में ऐसे फ़ना, जैसे फ़ना बाद-ए-सबा, हो महक साँसों से रवाँ, कुछ तो दीदार हो, कुछ हो बातें यूँ ही, कुछ सुनो, कुछ कहो, प्यार इतना हमें ना करो, आँख ये भर ना आए कहीं, ये घड़ी आएगी फिर कहाँ, चाह कर भी ना आएगी वो, प्यार इतना हमें तुम करो, मर के यादों में आए कहीं, प्यार इतना हमें ना करो, चढ़ के वो सर ना जाए कहीं,
जीस्त – life
ग़म-ए-ज़ीस्त – pains, sorrows of life
तस्लीम - accept
सहर - morning
हर ना जाए कहीं – lest it gets defeated
जुड़ा – knot of her hair
दीदार sight and view of beloved
वस्ल - meeting with beloved
कहकशाँ - galaxy
फ़ना – destroy
बाद-ए-सबा – morning breeze, zephyr
रवाँ – flowing
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