मिल के भी ना मिली ख़ुशी, मिल के भी ना मिली ख़ुशी, आँख क्यूँ शबनमी रही, मिल के भी ना तू मिल सका, ना तेरी महरमी रही, मिल के भी ना मिली ख़ुशी, ग़म को पनप ने के लिए, क्यूँ मिली दिल की ही ज़मीं, ग़म को पनप ने के लिए, क्यूँ मिली दिल की ही ज़मीं, क्यूँ हो गया ये अब कि ना आसमाँ ना ज़मीं रही, क्यूँ हो गया ये अब कि ना आसमाँ ना ज़मीं रही, मिल के भी ना तू मिल सका, ना तेरी महरमी रही, मिल के भी ना मिली ख़ुशी, जब तू गया था छोड़ कर, तब जो ये मातमी थी अब, जब तू गया था छोड़ कर, तब जो ये मातमी थी अब, कोई न हम-दमी रही, कोई न बाहमी रही, कोई न हम-दमी रही, कोई न बाहमी रही, मिल के भी ना तू मिल सका, ना तेरी महरमी रही, मिल के भी ना मिली ख़ुशी, रह के भी दूर तुझ से, क़ुर्बत यूँ ही क्यूँ बनी रही, रह के भी दूर तुझ से, क़ुर्बत यूँ ही क्यूँ बनी रही, साथी के मिल ने से भी, क्यूँ साथ की ही कमी रही, साथी के मिल ने से भी, क्यूँ साथ की ही कमी रही, मिल के भी ना तू मिल सका, ना तेरी महरमी रही, मिल के भी ना मिली ख़ुशी,
शबनमी - dewy
महरमी - intimacy
हम-निदा - singing in concord
दिल-सिताँ - beloved
ज़ंग - rust
मातमी - mourning
हम-दमी - companionship
बाहमी - reciprocity, mutual
क़ुर्बत - nearness
पनप - to sprout
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