अब वो बात कहाँ, वो 'इबादत अब तेरी चाहतों में कहाँ, अब वो बात कहाँ, वो 'इबादत अब तेरी चाहतों में कहाँ, हम क्या करतें उम्मीद कोई, अब अश्क हसरतों में कहाँ, बस हैं शब-भर के मेहमाँ, फिर रहेंगे तेरे आसमाँ में कहाँ, बस हैं शब-भर के मेहमाँ, फिर रहेंगे तेरे आसमाँ में कहाँ, बरसा दे बादल प्यार का कि ठंडक ऐसी बारिशों में कहाँ, कि ठंडक ऐसी बारिशों में कहाँ, शायद पता नहीं इन गुलों को, शायद नादाँ हैं सारे, शायद पता नहीं इन गुलों को, शायद नादाँ हैं सारे, जो तड़पन मेरे दिल में है, भँवरों की धड़कनों में कहाँ, अब वो बात कहाँ, अब कोई आग शमा' की लौ में कहाँ, अब ना आतिश-ए-आरज़ू कोई, है चैन करवटों में कहाँ, अब वो बात कहाँ, वो 'इबादत अब तेरी चाहतों में कहाँ,
'इबादत – prayer
हसरतों – unfulfilled desires
शब-भर – only for the night
मेहमाँ - guest
आसमाँ - sky
गुलों - roses
नादाँ - naive
तड़पन - agitation
शमा' - candle
लौ - flame
आतिश-ए-आरज़ू - acute desires or fire of acute desires, wishes
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